पटना। बिहार में स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी संभालने के बाद निशांत कुमार लगातार स्वास्थ्य व्यवस्था को और बेहतर बनाने की कोशिशों में जुटे हैं। अस्पतालों का औचक निरीक्षण हो, मरीजों से सीधे संवाद हो, अधिकारियों के साथ लगातार समीक्षा बैठकें हों या फिर जिलों तक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की योजना, स्वास्थ्य मंत्री की सक्रियता लगातार नजर आ रही है। हाल के महीनों में उनके लगातार अस्पताल दौरों की भी चर्चा रही है।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत का जोर इस बात पर है कि मरीजों को छोटी-छोटी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए बड़े अस्पतालों का रुख न करना पड़े और जिला स्तर पर ही अधिक से अधिक इलाज उपलब्ध हो। इसी सोच के तहत अनावश्यक रेफरल रोकने और जरूरतमंद मरीजों को समय पर उच्च संस्थान तक पहुंचाने पर भी विभागीय स्तर पर जोर दिया जा रहा है।
इसी सक्रियता के बीच अब स्वास्थ्य मंत्री निशांत के कामकाज की चर्चा एक और वजह से हुई है। पिछले दिनों बिहार लोक भवन में आयोजित ‘टीबी मुक्त बिहार’ विषय पर उच्चस्तरीय विचार-विमर्श संगोष्ठी में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने पिछले तीन-चार महीनों में टीबी उन्मूलन के लिए किए गए कार्यों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री निशांत और स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि को बधाई दी। राज्यपाल ने अभियान के सभी जिलों तक विस्तार और मोबाइल एक्स-रे मशीनों के जरिए स्क्रीनिंग की पहल की भी सराहना की। राज्यपाल ने इस दौरान टीबी के खिलाफ अभियान में तकनीकी सुविधाओं के साथ जनजागरूकता और सामाजिक भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया था। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य के सभी 38 जिलों में जिला टीबी केंद्र संचालित हैं और मरीजों की नि:शुल्क एक्स-रे जांच के लिए 499 केंद्र कार्यरत हैं।
अस्पतालों की सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी उपलब्धियों के अनुसार, नई सरकार के गठन के बाद राज्य के विभिन्न जिला अस्पतालों में 105 नए ICU बेड और 70 वेंटिलेटर युक्त गहन चिकित्सा इकाइयां शुरू की गई हैं। इसके बाद राज्य में कुल 190 ICU बेड और 120 वेंटिलेटर कार्यरत हैं। अनुमंडलीय अस्पतालों में डायलिसिस सेवा का भी विस्तार किया जा रहा है और अब तक 55 में से 25 अनुमंडलीय अस्पतालों में यह सेवा शुरू हो चुकी है।
पटना के PMCH में सेंट्रलाइज्ड रेडियोलॉजी सिस्टम शुरू हुआ है, जहां मरीजों को एक ही परिसर में अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, CT स्कैन और MRI जैसी प्रमुख जांच सुविधाएं मिल रही हैं। LNJP अस्पताल परिसर में 400 बेड वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का नया भवन तैयार हुआ है। IGIMS में करीब 10.25 करोड़ रुपये की लागत से 6 मॉड्यूलर नेत्र ऑपरेशन थिएटर, 6.55 करोड़ रुपये की लागत से 20 बेड का अत्याधुनिक CCM ICU, 8.25 करोड़ रुपये का CCTV कमांड सेंटर और 8.05 करोड़ रुपये की लागत से 16 नई मशीनों वाली डायलिसिस यूनिट शुरू की गई है।
मुजफ्फरपुर के होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र में अ त्याधुनिक ICU कॉम्प्लेक्स और SKMCH में 30 बेड के स्पेशल क्रिटिकल केयर यूनिट की शुरुआत भी हुई है। इससे मुजफ्फरपुर समेत उत्तर बिहार के गंभीर मरीजों को स्थानीय स्तर पर क्रिटिकल केयर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में विस्तार हुआ है। बता दें कि कैंसर के बेहतर इलाज के लिए लोगों को राज्य के बाहर जाना पड़ता था, स्वास्थ्य मंत्री की इस पहल से अब अपने राज्य में ही बेहतर सुविधा मिलेगी।
अस्पतालों में पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लेना, मरीजों से सीधे बात करना, अधिकारियों से जवाब लेना और दूसरी ओर स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए बड़े फैसलों को आगे बढ़ाना, इन सभी मोर्चों पर उनका फोकस नजर आ रहा है। यही वजह है कि स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े उनके कामकाज की चर्चा अब लगातार बढ़ रही है।
डॉक्टरों से लेकर तकनीकी कर्मियों तक नियुक्तियां
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए मानव संसाधन पर भी विशेष जोर दिया गया है। 200 विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 142 चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा 683 OT असिस्टेंट, 100 ECG टेक्निशियन, 792 ड्रेसर और 644 एक्स-रे टेक्निशियन यानी कुल 2,219 तकनीकी कर्मियों की पदस्थापना की गई है।
इसका असर अस्पतालों में सर्जरी, ECG, एक्स-रे और ड्रेसिंग जैसी सेवाओं की क्षमता बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है। विभागीय उपलब्धियों के अनुसार, पिछले तीन महीनों में 4.14 लाख से अधिक मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया और 19 हजार से अधिक मरीजों को सर्जरी की सुविधा दी गई। साथ ही अनावश्यक उच्चतर संस्थानों में होने वाले रेफरल में कमी आने की बात भी विभाग ने कही है।

मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में भी लिए गए कई बड़े फैसले
स्वास्थ्य मंत्री के अब तक के कार्यकाल में मेडिकल शिक्षा के विस्तार पर भी जोर दिया गया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से समस्तीपुर के श्रीराम जानकी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल तथा राजकीय मेडिकल कॉलेज, छपरा में 50-50 MBBS सीटों के संचालन की अनुमति मिली है। इसके अलावा राज्य के 16 ब्राउनफील्ड मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों को PPP मॉडल पर आगे बढ़ाने के प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिली है।
PMCH को 5,462 बेड वाले बड़े अस्पताल के रूप में विकसित करने का काम जारी है। IGIMS के पुनर्विकास एवं विस्तार के तहत 1,200 बेड के अस्पताल, हॉस्टल और आवासीय भवनों की परियोजना में 59.24 प्रतिशत काम पूरा होने की जानकारी दी गई है। वहीं AIIMS पटना के नए भवनों के निर्माण के लिए 26.76 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
मरीजों के लिए आर्थिक राहत और डिजिटल मॉनिटरिंग
मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष के तहत वार्षिक आय की सीमा 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 4 लाख रुपये की गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 25,731 लाभार्थियों के लिए कुल 202.63 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत हुई, जबकि 1 अप्रैल 2026 से 31 जुलाई 2026 तक 8,229 लाभार्थियों के लिए 70.86 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई।
वहीं, जिला और अनुमंडलीय अस्पतालों में बेड की रियल-टाइम मॉनिटरिंग शुरू की गई है, जिससे रेफरल से पहले खाली बेड की लाइव जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत हुई है। सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवा उपलब्ध कराने के मामले में बिहार लगातार 23वें महीने देश में पहले स्थान पर रहा है। वर्तमान में 504 प्रकार की दवाएं, 20 अतिरिक्त श्रेणी की दवाएं तथा 132 प्रकार के मेडिकल डिवाइस और कंज्यूमेबल्स नि:शुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
टीबी से लेकर एनीमिया तक अभियान
टीबी उन्मूलन अभियान में भी बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग की गई है। सितंबर के अंत में स्वास्थ्य मंत्री की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार बिहार में 3 करोड़ 50 लाख 61 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी थी, जिनमें 3 लाख 97 हजार 409 टीबी मरीजों की पहचान हुई और उनका उपचार चल रहा था। निक्षय पोषण योजना के तहत चिह्नित मरीजों को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता दी जा रही है, जबकि निक्षय मित्रों के सहयोग से करीब 66 हजार फूड बास्केट वितरित किए जा चुके हैं।
इसी तरह ‘एनीमिया मुक्त बिहार’ अभियान के तहत 1.20 करोड़ से अधिक लाभार्थियों की डिजिटल हीमोग्लोबिन जांच, नि:शुल्क दवा और पोषण परामर्श का लक्ष्य रखा गया है। ‘जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान के माध्यम से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कैंसर और हृदय रोग समेत गंभीर बीमारियों की नि:शुल्क स्क्रीनिंग, जांच, परामर्श और दवा उपलब्ध कराने की पहल भी चल रही है।
जिला अस्पतालों में बढ़ी IPD, सर्जरी में भी बड़ा इजाफा
स्वास्थ्य सेवाओं को जिला स्तर पर मजबूत करने का असर अस्पतालों के आंकड़ों में भी दिख रहा है। सितंबर 2026 में जिला अस्पतालों में 49,450 मरीज IPD में भर्ती हुए, जबकि जून में यह संख्या 26,443 थी। सितंबर में मधेपुरा 8,037 IPD दाखिलों के साथ सबसे आगे रहा। वहीं जिला अस्पतालों के इमरजेंसी विभाग में 2,05,566 मरीजों का पंजीकरण हुआ। सर्जरी के मामले में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। जून से सितंबर के बीच गायनी सर्जरी 2,156 से बढ़कर 6,131, जनरल सर्जरी 174 से 1,420 और ऑर्थोपेडिक्स सर्जरी 25 से बढ़कर 1,408 हो गई। सितंबर में मधेपुरा में 790, पटना में 710 और वैशाली में 682 सर्जरी हुईं। आयुष्मान भारत के तहत प्रोसीजर और सर्जरी की संख्या भी पिछले महीने के 1,728 से बढ़कर 2,098 हुई है। स्वास्थ्य विभाग अब जिला अस्पतालों में सर्जरी की संख्या और विविधता बढ़ाने के साथ नए OT उपकरण और 14 स्थानों पर C-Arm मशीनें उपलब्ध करा रहा है। साथ ही अनावश्यक रेफरल रोकने और स्थानीय स्तर पर ही मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
अब तक के कार्यकाल पर कहा जा सकता है कि स्वास्थ्य मंत्री निशांत की सक्रियता सिर्फ योजनाओं और बैठकों तक सीमित नहीं दिखती। अस्पतालों में पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लेना, मरीजों से सीधे बात करना, अधिकारियों से जवाब लेना और दूसरी ओर स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए बड़े फैसलों को आगे बढ़ाना, इन सभी मोर्चों पर उनका फोकस नजर आ रहा है। यही वजह है कि स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े उनके कामकाज की चर्चा अब लगातार बढ़ रही है। हालिया ‘टीबी मुक्त बिहार’ संगोष्ठी में राज्यपाल की ओर से स्वास्थ्य मंत्री दी गई बधाई ने भी इस चर्चा को एक अलग आयाम दिया है।












