पटना। बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) आलोक राज एक बार फिर अपने संगीत प्रेम को लेकर चर्चा में हैं। देश की प्रतिष्ठित म्यूजिक कंपनी T-Series ने उनकी आवाज में देवी मां का भक्ति गीत ‘जोतावाली शेरावाली मां’ रिलीज किया है। इस गाने में आलोक राज की आवाज में मां दुर्गा के प्रति भक्ति और समर्पण की झलक मिलती है। खास बात यह है कि आलोक राज की पहचान सिर्फ एक वरिष्ठ IPS अधिकारी के रूप में नहीं रही है, बल्कि वह लंबे समय से शास्त्रीय संगीत की साधना भी कर रहे हैं। पुलिस की जिम्मेदारियों के बीच संगीत के प्रति उनका यह जुनून उन्हें दूसरे अधिकारियों से अलग पहचान देता है।
छह साल की साधना के बाद शुरू हुआ था संगीत का सफर
आलोक राज का संगीत से जुड़ाव कोई नया नहीं है। स्कूल-कॉलेज के दिनों से ही उन्हें फिल्मी गाने गाने का शौक था, पर 20 अगस्त 1989 को IPS सेवा में आने के बाद पुलिस की जिम्मेदारियों के कारण उनका यह शौक पीछे छूट गया। करीब 22 साल तक पुलिस सेवा में व्यस्त रहने के बाद उन्होंने दिसंबर 2011 में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा लेनी शुरू की। उन्होंने संगीत गुरु अशोक कुमार प्रसाद के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया और करीब छह साल तक नियमित रियाज किया। इसके बाद 2017 में T-Series के बैनर तले उनका पहला म्यूजिक एल्बम ‘साईं रचना’ रिलीज हुआ। पूर्व डीजीपी आलोक राज ने साहित्य और संगीत की दुनिया के दिग्गजों की रचनाओं को अपनी आवाज दी। उन्होंने पद्मभूषण से सम्मानित कवि गोपालदास नीरज के गीतों पर आधारित एलबम तैयार किया था। इसके लिए उन्होंने नीरज से उनके गीतों के अधिकार भी प्राप्त किए थे। इसके बाद मशहूर कवि और शायर दुष्यंत कुमार की गजलों को आवाज दी। उन्होंने कबीर भजनों का एलबम भी रिलीज किया। भगवान शिव पर गाया उनका भजन ‘ये भोला सबसे बड़ा है’ भी काफी चर्चित हुआ। इसके अलावा ‘जय अंबे मां जय जय अंबे मां’ और ‘वल्कल ना ओढ़ री’ जैसे गीतों में भी उनकी आवाज सुनने को मिली है।
1989 बैच के IPS अधिकारी रहे हैं आलोक राज
मुजफ्फरपुर जिले से ताल्लुक रखने वाले आलोक राज 1989 बैच के बिहार कैडर के IPS अधिकारी हैं। उन्होंने अपने लंबे पुलिस करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वह एकीकृत बिहार के दौरान रांची, गुमला, देवघर, पश्चिमी सिंहभूम, हजारीबाग, सीतामढ़ी और बेगूसराय जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर तैनात रहे। इसके बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में DIG और IG के रूप में भी सेवाएं दीं। वर्ष 2004 से 2011 के बीच CRPF में रहते हुए उन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पटना में ASP रहते हुए एक पुलिस मुठभेड़ में चार अपराधियों के मारे जाने के मामले में उन्हें राष्ट्रपति का वीरता पदक भी मिला था। बंगाल के नंदीग्राम में जब टाटा नैनो प्लांट के विरोध में जब हिंसक आंदोलन हुआ तो बतौर सीआरपीएफ आइजी आलोक राज ने कई दिनों तक वहां मोर्चा संभाले रखा। नंदीग्राम में शांति बहाली और विधि-व्यवस्था बहाल करने के लिए उनकी उस समय पूरे देश में प्रशंसा हुई।

करीब 105 दिनों के कार्यकाल में ही किया बेहतरीन काम
बता दें कि 30 अगस्त 2024 को आईपीएस आलोक राज ने बिहार के DGP का प्रभार संभाला था। उन्हें तत्कालीन DGP आरएस भट्टी के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद यह जिम्मेदारी मिली थी। हालांकि, उनका कार्यकाल करीब 105 दिनों का ही रहा, बावजूद इसके उन्होंने बेहतरीन काम किया था। इसके बाद उन्होंने बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी भी संभाली। 31 दिसंबर 2025 को वह पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हुए। बिहार के पूर्व डीजीपी आलोक राज ने पदभार संभालते ही बिहार पुलिस को बेहतर बनाने के लिए छह मूलमंत्र दिए थे। उन्होंने सभी पुलिस अधिकारियों और जवानों को ‘6 स’ के सिद्धांत पर काम करने की सलाह दी थी। इनमें समय, सार्थकता, संवेदनशीलता, शक्तिशाली होना, सत्यनिष्ठा और स्पीडी ट्रायल शामिल थे। उनका मानना था कि पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम कम होना चाहिए, हर कार्रवाई प्रभावी दिखनी चाहिए, पीड़ितों के प्रति पुलिसकर्मियों में संवेदनशीलता होनी चाहिए और अपराधियों में पुलिस का खौफ होना चाहिए। साथ ही, पुलिसकर्मी अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार रहें और समय पर जांच पूरी कर आरोपपत्र दाखिल करें, ताकि स्पीडी ट्रायल के जरिए अपराधियों को सजा मिल सके।
तीन बार राष्ट्रपति पदक से सम्मानित हो चुके हैं आलोक राज
आलोक राज का शैक्षणिक और पुलिसिंग का सफर उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से भूगर्भशास्त्र में एमएससी की पढ़ाई गोल्ड मेडल के साथ पूरी की। उत्कृष्ट पुलिस सेवा के लिए उन्हें तीन बार राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 1994 में पुलिस वीरता पदक, 2008 में सराहनीय सेवा पदक और 2016 में विशिष्ट सेवा पदक से नवाजे गए। इसके अलावा, वर्ष 2019 में उन्हें उत्कृष्ट पुलिस कार्यों के लिए अटल रत्न सम्मान भी मिला। अपने पुलिस करियर के दौरान आलोक राज ने कई चुनौतीपूर्ण अभियानों का नेतृत्व किया। पश्चिमी सिंहभूम के एसपी रहते हुए उन्होंने वन माफिया के खिलाफ कार्रवाई की थी, जबकि हजारीबाग के एसपी के रूप में कोयला माफिया और नक्सलियों के विरुद्ध अभियान चलाया था। उन्होंने इटली में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना से संबंधित उच्चस्तरीय प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। बिहार पुलिस में डीजीपी बनने से पहले उन्होंने विशेष शाखा, सीआईडी और विधि-व्यवस्था के एडीजी सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। इसके अलावा बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस, पुलिस प्रशिक्षण और बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के महानिदेशक के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।
संगीत को मानते हैं व्यक्तित्व को बेहतर बनाने का माध्यम
आलोक राज कई बार सार्वजनिक मंचों पर भी अपनी गायकी का हुनर दिखा चुके हैं। बिहार दिवस के अलावा सोनपुर के हरिहरक्षेत्र महोत्सव, बोधगया के बौद्ध महोत्सव, राजगीर महोत्सव, पावापुरी महोत्सव और ताज महोत्सव जैसे आयोजनों में भी उन्होंने प्रस्तुति दी है। आकाशवाणी, दूरदर्शन और डीडी उर्दू के कार्यक्रमों में भी वह अपनी गायकी पेश कर चुके हैं। उनका मानना है कि संगीत इंसान के व्यक्तित्व को बेहतर बनाता है। पुलिस जैसी तनावपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाले व्यक्ति के लिए कला और संगीत सकारात्मकता बनाए रखने का माध्यम हो सकते हैं। यही वजह है कि व्यस्त प्रशासनिक और पुलिस सेवा के दौरान भी उन्होंने अपने संगीत के शौक को जिंदा रखा। अब T-Series के नए भक्ति गीत ‘जोतावाली शेरावाली मां’ के जरिए उनकी आवाज एक बार फिर संगीत प्रेमियों और माता के भक्तों तक पहुंच रही है। नए भक्ति गीत में संगीत निर्देशन की जिम्मेदारी दिलीप सेन-समीर सेन ने संभाली है, जबकि इसके बोल अशोक शौक ने लिखे हैं। गाने में आलोक राज खुद नजर आ रहे हैं। इसे T-Series Bhakti Sagar के बैनर तले रिलीज किया गया है।












