पटना। राज्य में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC) की अनुशंसा पर चयनित 683 ओटी असिस्टेंट (OT Assistant), 100 ईसीजी टेक्निशियन (ECG Technician ) के सफल अभ्यर्थियों की राज्य के विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पदस्थापना कर दी गई है।
683 ओटी असिस्टेंट में 124 महिला एवं 559 पुरुष सफल अभ्यर्थी शामिल हैं, जबकि 100 ईसीजी टेक्निशियन में 42 महिला एवं 58 पुरुष अभ्यर्थी चयनित हुए हैं। इन तकनीकी कर्मियों की नियुक्ति से राज्य के मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों, जिला अस्पतालों, अनुमंडलीय अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), रेफरल अस्पतालों तथा अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में ओटी असिस्टेंट एवं ईसीजी टेक्निशियन की कमी दूर होगी। इससे अस्पतालों में सर्जरी संबंधी सेवाओं और मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली ईसीजी जांच सुविधाओं की गुणवत्ता, दक्षता एवं त्वरित सेवा में उल्लेखनीय सुधार आएगा।
ओटी असिस्टेंट की पदस्थापना पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में 16, गया जी स्थित अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (ANMMCH) में 12, दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (DMCH) में 11, भागलपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (JLNMCH) में 20 तथा अन्य संस्थानों एवं अस्पतालों में की गई है। इसी प्रकार ईसीजी टेक्निशियन की पदस्थापना पटना स्थित इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान (IGIC) में 15, पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में 6, श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) में 4, दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल( DMCH) में 4 सहित अन्य संस्थानों एवं अस्पतालों में की गई है। इन तकनीकी कर्मियों की पदस्थापना से जिला अस्पतालों, अनुमंडलीय अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), रेफरल अस्पतालों तथा अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में ओटी असिस्टेंट एवं ईसीजी टेक्निशियन की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे सर्जरी संबंधी सेवाओं एवं ईसीजी जांच सुविधाओं की गुणवत्ता, दक्षता और त्वरित सेवा में सुधार होगा।
बिना प्राथमिक जांच मरीजों को रेफर करने पर जताई नाराजगी
स्वास्थ्य विभाग ने पूरी पदस्थापना प्रक्रिया को पारदर्शी, मेरिट आधारित एवं संवेदनशील बनाया है। पदस्थापना के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सॉफ्टवेयर के माध्यम से रैंडमाइजेशन की प्रक्रिया अपनाई गई है। दिव्यांग अभ्यर्थियों को यथासंभव उनके गृह जिले (होम डिस्ट्रिक्ट) में पदस्थापित किया गया है। वहीं महिला एवं पुरुष अभ्यर्थियों को उनकी मेरिट के अनुरूप निकटवर्ती जिलों के पास पदस्थापना देने का प्रयास किया गया है।
सभी ओटी असिस्टेंट, ईसीजी टेक्निशियन को निर्देश दिया गया है कि वे एक माह के भीतर अपने सभी शैक्षणिक एवं अन्य आवश्यक मूल प्रमाण-पत्रों के साथ संबंधित संस्थान में योगदान देंगे। संबंधित संस्थान के अधीक्षक/अधीक्षक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा उनके प्रमाण-पत्रों का मूल अभिलेखों से मिलान कर सत्यापन सुनिश्चित किया जाएगा तथा तीन माह के भीतर निर्गत संस्थानों से उनकी जांच एवं सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण कर विभाग को प्रतिवेदित किया जाएगा।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने सभी नवपदस्थापित ओटी असिस्टेंट एवं ईसीजी टेक्निशियन को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराकर आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ एवं समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी नवपदस्थापित ओटी असिस्टेंट एवं ईसीजी टेक्निशियन पूरी निष्ठा एवं जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।












