Chief Minister Samrat Choudhary and Health Minister Nishant break record of Anaemia Screening in Bihar-Bihar Aaptak

अनीमिया मुक्त बिहार : अब तक राज्य में 94.71 लाख से अधिक लोगों की हुई स्क्रीनिंग

पटना। राज्य में अनीमिया (रक्त अल्पता) की दर को कम करने के उद्देश्य से बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित “अनीमिया मुक्त बिहार” विशेष अभियान के तहत राज्यभर में व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग एवं उपचार की कार्रवाई जारी है। विशेष अभियान के अंतर्गत 25 अगस्त से 28 सितंबर 2026 तक राज्य में कुल 94,71,377 लोगों की अनीमिया जांच की जा चुकी है।

उल्लेखनीय है कि इस अभियान का शुभारंभ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा 25 अगस्त 2026 को किया गया था। अभियान के तहत अब तक की गई कुल स्क्रीनिंग में 5,632 लोग गंभीर अनीमिया (Severe Anemia), 3,34,171 लोग मध्यम अनीमिया (Moderate Anemia) तथा 14,22,767 लोग अल्प अनीमिया (Mild Anemia) से ग्रसित पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिन्हित अनीमिया पीड़ित लाभार्थियों को आवश्यकता के अनुसार उपचार, पोषण संबंधी परामर्श, रेफरल एवं फॉलो-अप की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। यह विशेष अभियान 25 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक संचालित किया जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि अनीमिया मुक्त बिहार अभियान के माध्यम से राज्य के अधिक से अधिक लोगों तक स्क्रीनिंग, उपचार और पोषण संबंधी परामर्श की सुविधा पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। अनीमिया की समय पर पहचान होने से लाभार्थियों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना आसान होता है। विशेष रूप से बच्चों, किशोर-किशोरियों, महिलाओं तथा गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के स्वास्थ्य पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि राज्य में अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है और स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्क्रीनिंग के साथ-साथ गंभीर एवं मध्यम अनीमिया से ग्रसित पाए गए लाभार्थियों के उपचार, रेफरल एवं फॉलो-अप पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इस अभियान के तहत राज्य में अनीमिया की जांच एवं आवश्यक उपचार के लिए 1,20,82,500 लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 28 सितंबर तक 94,71,377 लोगों की जांच पूरी की जा चुकी है।

स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि पोषण अनीमिया की रोकथाम का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए लाभार्थियों को आयरन युक्त स्थानीय खाद्य पदार्थों, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के संबंध में भी जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभियान की सफलता के लिए स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों एवं कर्मियों के साथ-साथ आम लोगों की सहभागिता भी आवश्यक है।

स्वास्थ्य संस्थानों से लेकर विद्यालयों तक स्क्रीनिंग

अभियान के तहत अनीमिया की जांच के लिए जिला अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, रेफरल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आयुष्मान आरोग्य मंदिर एवं स्वास्थ्य उप-केंद्रों पर व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस (VHSND), प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) सत्र एवं अन्य सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में भी स्क्रीनिंग चलंत चिकित्सा दल द्वारा की जा रही है। जांच के लिए डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप्स, क्यूबिट, लैंसेट, अल्कोहल स्वाब एवं डिस्पोजेबल दस्ताने जैसी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। उपचार के लिए आवश्यकतानुसार आयरन-फोलिक एसिड सिरप एवं आयरन-फोलिक एसिड की निर्धारित खुराक वाली गोलियां निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही, एनीमिया से ग्रसित गर्भवती महिलाओं को आवश्यकता के अनुसार FCM (Ferric Carboxymaltose) थेरेपी की सुविधा भी प्रदान की जा रही है।

गंभीर एवं मध्यम अनीमिया वाले मरीजों के उपचार और फॉलो-अप पर विशेष ध्यान

अभियान के दौरान मध्यम एवं गंभीर अनीमिया से ग्रसित पाए जाने वाले लाभार्थियों के लिए उचित उपचार, आवश्यकता के अनुसार उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफरल, निरंतर परामर्श एवं फॉलो-अप की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। इसके तहत लाभार्थियों को आई. वी. सुक्रोज़ / एफ. सी. एम. इंजेक्शन भी उपलब्ध कराई जा रही है।जांच के बाद लाभार्थियों का डेटा “अनीमिया मुक्त भारत अभियान एप्लीकेशन” पर डिजिटल रूप से दर्ज किया जा रहा है, जिससे लाभार्थियों की पहचान, उपचार एवं फॉलो-अप की निगरानी को बेहतर बनाया जा सके।

पोषण संबंधी परामर्श भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा

अनीमिया की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए केवल दवा ही नहीं, बल्कि पोषण संबंधी जागरूकता पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। जांच कराने वाले लाभार्थियों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध आयरन युक्त खाद्य पदार्थों, संतुलित आहार, सही खान-पान, मोटापा नियंत्रण एवं अन्य पोषण संबंधी विषयों पर परामर्श दिया जा रहा है। इस कार्य में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO), एएनएम तथा आरएमएनसीएचए काउंसलर्स सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

बांका, सीतामढ़ी और पश्चिमी चंपारण सहित कई जिलों में बेहतर प्रगति

28 सितंबर 2026 तक की उपलब्धि के आधार पर बांका, सीतामढ़ी, पश्चिमी चंपारण,सारण एवं मधेपुरा अग्रणी जिलों में शामिल हैं। साथ ही अन्य जिलों की प्रगति अपने निर्धारित लक्ष्य से उपर है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी जिलों में अभियान की निरंतर समीक्षा की जा रही है तथा स्क्रीनिंग, उपचार एवं फॉलो-अप की गति को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश समय-समय पर दिए जा रहे हैं।

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