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अंकों के आधार पर बीएड में इस वर्ष हो दाखिला, कुलाधिपति से किया अनुरोध

पटना । बिहार टीचर एडुकेटर्स एसोसिएशन (बीटा) के पूर्व महासचिव और नालंदा कॉलेज, बिहारशरीफ (पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय) के बीएड विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव कुमार ने राज्यपाल सह कुलाधिपति से बीएड के नए सत्र 2020-22 में अंकों के आधार पर नामांकन का आदेश देने का अनुरोध किया है। कुलाधिपति फागू चौहान को भेजे पत्र में डॉ. कुमार ने कहा कि ऐसा करके न सिर्फ बीएड कॉलेजों के समक्ष उत्पन्न सेशन गैप के खतरे को टाला जा सकता है, बल्कि प्रदेश के 350 से अधिक निजी व स्ववित्तपोषित बीएड कॉलेजों में कार्यरत 10 हजार से अधिक शिक्षक व शिक्षकेतर कर्मियों और उनके परिजनों को भूखे मरने से बचाया जा सकता है। गौरतलब है कि बीएड कॉलेजों में 2018 से संयुक्त प्रवेश परीक्षा के आधार पर छात्रों को दाखिला मिलता रहा है। इससे पहले कहीं-कहीं विश्वविद्यालय और कहीं-कहीं कॉलेज स्तर पर प्रवेश परीक्षा होती रही है। सामान्य तौर पर बीए के अंकों के आधार पर ही बीएड में दाखिला मिलता रहा है।

29 मार्च, फिर 19 जुलाई को घोषित परीक्षा हो चुकी है स्थगित
इस वर्ष बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा आयोजित करने का जिम्मा ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा को सौंपा गया था, लेकिन कोरोना के कारण 29 मार्च को निर्धारित प्रवेश परीक्षा स्थगित कर दी गई। फिर प्रवेश परीक्षा की तिथि 19 जुलाई घोषित हुई, लेकिन इसे भी पिछले हफ्ते कोरोना के फैलाव को देखते हुए अगले आदेश तक स्थगित करने का फैसला लिया गया है। प्रवेश परीक्षा कब होगी, यह कहना मुश्किल है। जैसे-जैसे विलंब हो रहा है, सेशन गैप का खतरा बढ़ रहा है। आमतौर पर बीएड का सेशन जुलाई के पहले हफ्ते में शुरू होता है और एक वर्ष में कम से कम 220 दिन क्लास की अनिवार्यता है। समय पर प्रवेश परीक्षा नहीं होने से एक तरफ जहां बीएड कोर्स में दाखिला लेने को उत्सुक छात्र-छात्राओं में मायूसी है, दूसरी ओर शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मी भी दुखी हैं। उनके समक्ष नौकरी पर संकट उत्पन्न होता दिख रहा है।

इस साल करीब 35 हजार सीटों के लिए 1.25 लाख अभ्यर्थी देंगे परीक्षा
डॉ. कुमार का मानना है कि चूंकि प्रवेश परीक्षा के आधार पर नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पूर्व बीए के प्राप्तांक के आधार पर ही बीएड में दाखिला होता रहा है। अतः कोरोना संकट के इस दौर में उसी प्रक्रिया को पुनः अपनाकर बीएड के सेशन को सामान्य बनाए रखा जा सकता है। इस साल लगभग 35 हजार सीटों के लिए एक लाख 25 हजार अभ्यर्थी संयुक्त प्रवेश परीक्षा में हिस्सा लेंगे। डॉ. कुमार ने तमाम परिस्थितियों के मद्देनजर कुलाधिपति से छात्र, शिक्षक, कर्मियों और बीएड कॉलेजों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए विचार कर शीघ्र फैसला लेने का अनुरोध किया है।

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