पटना। भोजपुर की मनीषा पटेल की सफलता की कहानी संघर्ष, आत्मविश्वास और परिवार के मजबूत समर्थन की मिसाल है। सुरक्षित प्राइवेट जॉब छोड़कर सेल्फ स्टडी से की तैयारी, UPSC में महज 2 अंकों से इंटरव्यू से चूकीं, अब 70वीं BPSC में मिली सफलता
भोजपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड के डावां गांव की रहने वाली मनीषा पटेल ने 70वीं BPSC परीक्षा में सफलता हासिल कर बिहार प्रशासनिक सेवा में 121वीं रैंक प्राप्त की है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर बिहार प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने वाली मनीषा की यह सफलता मेहनत, आत्मविश्वास और परिवार के निरंतर सहयोग की कहानी है।
गांव के स्कूल से शुरू हुई पढ़ाई
मनीषा पटेल का संबंध भोजपुर जिले के डावां गांव से है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा विवेकानंद पब्लिक स्कूल, बिहिया, भोजपुर से हुई। उन्होंने वर्ष 2015 में 10वीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वर्ष 2015 से 2017 के बीच जवाहर नवोदय विद्यालय, कैमूर से 12वीं की पढ़ाई की।
12वीं के बाद मनीषा ने बिना किसी कोचिंग के JEE Main की परीक्षा दी और उनका चयन NIT अगरतला में हुआ। यहां उन्होंने वर्ष 2017 से 2021 तक Production Engineering में B.Tech की पढ़ाई पूरी की।
कॉलेज प्लेसमेंट से मिली नौकरी, लेकिन लक्ष्य था प्रशासनिक सेवा
इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद अगस्त 2021 में मनीषा ने एक निजी कंपनी में नौकरी शुरू की। उन्होंने करीब एक साल तक नौकरी की। इसी दौरान वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करना चाहती थीं, लेकिन नौकरी के साथ पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में मनीषा ने एक कठिन फैसला लिया। उन्होंने वर्ष 2022 में अपनी निजी नौकरी छोड़ दी और सेल्फ स्टडी के जरिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी।
मनीषा के लिए यह फैसला आसान नहीं था। कॉलेज प्लेसमेंट के जरिए मिली एक सुरक्षित नौकरी छोड़कर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना उनके करियर के साथ-साथ परिवार के लिए भी बड़ा निर्णय था, लेकिन परिवार ने उनका साथ दिया और उन्हें अपने फैसले के अनुसार आगे बढ़ने की पूरी आजादी दी।
ग्रामीण परिवेश से निकलकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई, निजी नौकरी, नौकरी छोड़कर सेल्फ स्टडी, UPSC में महज दो अंकों से चूक और फिर BPSC में सफलता—मनीषा पटेल की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने लक्ष्य के लिए कठिन फैसले लेने और लगातार मेहनत करने का साहस रखते हैं।

UPSC में सिर्फ 2 नंबर से रह गया था इंटरव्यू
मनीषा ने इससे पहले UPSC 2024 मेंस परीक्षा भी दी थी। वह इंटरव्यू के लिए चयनित होने से महज 2 अंकों से चूक गई थीं। यह असफलता उनके लिए निराशाजनक जरूर रही, लेकिन उन्होंने इसे अपनी मंजिल के रास्ते की रुकावट नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और इस बार 70वीं BPSC परीक्षा में सफलता हासिल कर बिहार प्रशासनिक सेवा में जगह बनाई।
पिता और भाई ने दिया सबसे बड़ा हौसला
मनीषा अपने परिवार को अपनी सफलता का महत्वपूर्ण आधार मानती हैं। वह एक संयुक्त परिवार से आती हैं। फिलहाल उनके साथ उनके पिता, मां और छोटा भाई रहते हैं। उनके पिता विंध्येश्वरी दुबे महाविद्यालय के प्राचार्य हैं, जबकि उनके छोटे भाई भारतीय डाक विभाग में कार्यरत हैं। मनीषा बताती हैं कि नौकरी छोड़कर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने के फैसले में उनके पिता और भाई ने उनका पूरा साथ दिया।
मनीषा के मुताबिक, परिवार की ओर से उन्हें यह भरोसा मिला कि तुम्हें जो निर्णय लेना है, लो, हम तुम्हारे साथ हैं। यही भरोसा उनके लिए तैयारी के दौरान बड़ी ताकत बना। मनीषा के चाचा-चाची और पूरे परिवार का भी उनकी यात्रा में महत्वपूर्ण सहयोग रहा। वह अपनी चाची सुसुम लता कुशवाहा, जो वर्ष 2020 में जगदीशपुर विधानसभा से चुनाव भी लड़ चुकी हैं, और चाचा मंजीत चौधरी समेत परिवार के अन्य सदस्यों के सहयोग को भी अपनी सफलता में अहम मानती हैं।
अब पूरे मन से बिहार के लोगों की सेवा करूंगी
70वीं BPSC में चयन के बाद मनीषा बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि अब उन्हें बिहार और बिहार के लोगों की सेवा करने का अवसर मिलेगा और वह अपनी जिम्मेदारी को पूरी लगन और ईमानदारी से निभाने की कोशिश करेंगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हाथों नियुक्ति पत्र प्राप्त करना भी मनीषा के लिए बेहद खुशी का क्षण रहा। उनका कहना है कि इस सफलता के बाद उन्हें महसूस हो रहा है कि लंबे समय से की गई उनकी मेहनत आखिरकार सफल हुई है।












