सम्राट चौधरी ने गुरु गोविंद सिंह सदर अस्पताल के नवनिर्मित भवन सहित कई स्वास्थ्य परियोजनाओं का किया लोकार्पण

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को पटना सिटी स्थित गुरु गोविंद सिंह सदर अस्पताल के नवनिर्मित भवन सहित कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य परियोजनाओं का उद्घाटन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने की। मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न जिला अस्पतालों में स्थापित 105 नए आईसीयू बेड, 70 वेंटिलेटर युक्त गहन चिकित्सा इकाइयों (आईसीयू) तथा 24×7 आपातकालीन सेवाओं का भी लोकार्पण किया।

इस अवसर पर कार्यक्रम में बिहार सरकार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री प्रधान सचिव दीपक कुमार, स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, डॉ. त्यागराजन एस. एम., विशेष सचिव, स्वास्थ्य विभाग, अमित कुमार पांडेय, कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति (SHSB), सुब्रत कुमार सेन, प्रबंध निदेशक, बीएमएसआईसीएल (BMSICL) स्वास्थ्य मंत्री के आप्त सचिव कौशलेंद्र कुमार सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान राज्य के सरकारी अस्पतालों में लोक-निजी साझेदारी (PPP) मॉडल के तहत निःशुल्क पैथोलॉजी सेवाओं की शुरुआत की गई। पहले चरण में 11 हब लैब (जांच केंद्र ) और उनसे जुड़ी 221 स्पोक लैब यानी नमूना संग्रहण इकाई शुरू की गई हैं। इसके अलावा राज्य के 25 अनुमंडलीय अस्पतालों में निःशुल्क डायलिसिस सेवा का भी लोकार्पण किया गया।

कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने गुरु गोविंद सिंह सदर अस्पताल के नए भवन का निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया। सबसे पहले इमरजेंसी वार्ड का निरीक्षण किया। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि मरीजों की गंभीरता के अनुसार इमरजेंसी को ग्रीन, येलो और रेड जोन में विभाजित किया गया है, ताकि जरूरतमंद मरीजों को तुरंत और बेहतर इलाज मिल सके। इसके बाद मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल के ऑर्थो ऑपरेशन थिएटर (OT) का निरीक्षण किया।

स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा, हर अनुमंडल तक पहुंचेगी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा, ICU और डायलिसिस सेवाओं का विस्तार होगा

इस दौरान अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुधा शंकर राय एवं डॉ. प्रभात ने उन्हें आधुनिक सर्जरी सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन थिएटर में अत्याधुनिक एनेस्थीसिया वर्क स्टेशन (Anesthesia Workstation) स्थापित किया गया है। यह एक हाईटेक चिकित्सा उपकरण है, जिसका उपयोग सर्जरी के दौरान मरीज को सुरक्षित रूप से एनेस्थीसिया (बेहोशी या सुन्न करने की दवा) देने, कृत्रिम श्वसन (वेंटिलेशन) उपलब्ध कराने तथा हृदय गति, रक्तचाप, ऑक्सीजन स्तर सहित मरीज के सभी महत्वपूर्ण जीवन संकेतों (वाइटल्स) की लगातार निगरानी करने के लिए किया जाता है। इस आधुनिक व्यवस्था से सर्जरी अधिक सुरक्षित, प्रभावी और मरीजों के लिए बेहतर बनेगी। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल में मरीजों के मार्गदर्शन के लिए नए साइन बोर्ड लगाए हैं। इनमें भूतल से चौथी मंजिल तक उपलब्ध सभी स्वास्थ्य सेवाओं, विभागों और कमरों की स्पष्ट जानकारी दी गई है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

अस्पताल में उपलब्ध सर्जिकल सुविधाओं की जानकारी देने के लिए अलग-अलग सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। इन बोर्डों के माध्यम से बताया गया है कि अस्पताल के सात प्रमुख विभागों में कुल 60 प्रकार की सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। इनमें ऑर्थोपेडिक विभाग में 15, सामान्य सर्जरी विभाग में 13, नेत्र रोग विभाग में 9, स्त्री रोग ( गाइनोकोलॉजी विभाग) में 4, प्रसूति विज्ञान विभाग ((Obstetrics Department) में 7, दंत चिकित्सा विभाग में 7, तथा कान, नाक एवं गला (ईएनटी) विभाग में 5 प्रकार की सर्जरी की जाती है।

इन सुविधाओं के तहत हर्निया, अपेंडिक्स, पित्ताशय, मोतियाबिंद, सिजेरियन डिलीवरी, हड्डियों के जटिल ऑपरेशन, दांतों के उपचार तथा कान, नाक एवं गला संबंधी विभिन्न सर्जरी सहित कई गंभीर बीमारियों का इलाज अब एक ही अस्पताल में उपलब्ध होगा। इससे मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार मिलेगा और सामान्य उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों में रेफर करने की आवश्यकता भी काफी कम होगी। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत कुमार ने निर्देश दिया कि मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए इन सभी सूचना बोर्डों को हिंदी भाषा में भी लगाया जाए।

स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा कि राज्य सरकार जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में कदम उठाते हुए राज्य के सभी 38 जिलों के अनुमंडल अस्पतालों (SDH) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में ICU बेड तथा वेंटिलेटर की संख्या बढ़ाई जा रही है। इसके साथ ही 25 अनुमंडलों में डायलिसिस सुविधा का विस्तार किया गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य जिला अस्पतालों को मजबूत करना और मरीजों के अनावश्यक रेफरल को रोकना है।

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