बाजार गुलज़ार होने दीजिए, बेहतर यही आप घर से मत निकलिए
बाज़ार को गुलज़ार होने दीजिए, आप ‘बर्बाद’ होने से बचिए। फैसले यूं ही आते-जाते रहेंगे, सरकारें बनती-बिगड़ती रहेंगी, पर हमारी-आपकी ज़िंदगी दुबारा नहीं मिलेगी, इसलिए अब भी वही ‘घिसी पिटी’Continue Reading