SDM Avinash Singh from Jehanabad Cleared BPSC 70th-Bihar Aaptak

-20°C की जमा देने वाली ठंड, दिन में नौकरी और रात में किताबों से जंग, तब पूरा हुआ SDM बनने का सपना!

पटना। बिहार के जहानाबाद के रहने वाले अविनाश सिंह की कहानी बताती है कि मंज़िल उन्हीं को मिलती है, जो हालातों से हार मानने के बजाय उन्हें चुनौती देना जानते हैं। 2018 में SSC CGL के जरिए Defence Accounts Department में सरकारी नौकरी हासिल करने वाले अविनाश ने करीब 5 साल तक केरल में सेवा दी। इसके बाद वर्ष 2023 से 2025 तक उनकी पोस्टिंग लद्दाख में रही। ऐसी जगह, जहां सर्दियों में तापमान अक्सर -10°C से -20°C तक पहुंच जाता है।

पिता के निधन के बाद नहीं छोड़ा पढ़ाई का सपना, मां के संघर्ष ने लिखी सफलता की कहानी

हालांकि इस जमा देने वाली ठंड के बीच अविनाश के भीतर एक और जुनून जल रहा था—BPSC पास कर बिहार प्रशासनिक सेवा में SDM बनना। सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक सरकारी नौकरी, लंच ब्रेक में कुछ वक्त पढ़ाई के लिए और फिर ऑफिस से लौटने के बाद किताबों के साथ लंबी रातें। कई-कई रात 2 से 3 बजे तक पढ़ाई चलती। बाहर लद्दाख की हाड़ कंपा देने वाली ठंड थी, लेकिन अविनाश के इरादे उससे भी ज्यादा मजबूत थे।

अगले दिन फिर वही नौकरी, वही जिम्मेदारियां और फिर वही संघर्ष

अविनाश सिंह ने किसी कोचिंग का सहारा नहीं लिया। Self Study, अनुशासन और लगातार मेहनत को अपना हथियार बनाया। इसी दौरान उन्होंने लद्दाख में रहते हुए AAO की विभागीय परीक्षा भी सफलतापूर्वक पास की। बिहार आपतक से बातचीत में अविनाश सिंह ने बताया कि वर्ष 2024 में 70वीं BPSC का फॉर्म भरते समय ही मैंने अपने लिए एक बड़ा लक्ष्य तय किया था कि Bihar Administrative Service में SDM बनना है।

मंजिल उसी को मिलती है, जिसके हौसले बुलंद हो

और आखिरकार मेहनत रंग लाई…

70वीं BPSC में 78वीं रैंक हासिल कर अविनाश सिंह ने अपने दूसरे प्रयास में SDM बनने का सपना पूरा कर लिया। लेकिन इस सफलता की कहानी सिर्फ नौकरी और परीक्षा तक सीमित नहीं है। इस सफर में उन्होंने शादीशुदा जिंदगी, एक साल की बेटी की जिम्मेदारी और कृषि पर निर्भर परिवार की आर्थिक मदद को भी बखूबी संभाला। यानी एक तरफ नौकरी की जिम्मेदारी, दूसरी तरफ परिवार की चिंता और तीसरी तरफ सिविल सेवा का सपना… फिर भी उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी।

लद्दाख की -20°C की ठंड भी उनके हौसले को नहीं जमा सकी

अविनाश सिंह की कहानी उन हजारों युवाओं के लिए एक संदेश है, जो नौकरी करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। समय कम हो सकता है, संसाधन सीमित हो सकते हैं, मुश्किलें बड़ी हो सकती हैं, लेकिन अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत लगातार हो, तो मंज़िल दूर नहीं रहती। अविनाश ने सिर्फ BPSC पास नहीं किया, उन्होंने यह साबित किया कि जिम्मेदारियों के बीच भी सपनों को जिंदा रखा जा सकता है और उन्हें हकीकत में बदला जा सकता है।

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